UP Board 10th Marking Rule Changed!अब ऐसे मिलेंगे नंबर | राज्यपाल की मंजूरी के बाद बड़ा फैसला

UP Board 10th Marking Rule Changed:दोस्तों, बड़ी खबर निकलकर आ रही है यूपी बोर्ड से। माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश ने हाईस्कूल के बच्चों के लिए विज्ञान और गृहविज्ञान विषय में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब तक इन दोनों विषयों में जो आंतरिक मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होता था, उसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

जी हां, अब स्कूल में नंबर देने की व्यवस्था नहीं रहेगी। इसकी जगह अब सीधे परिषद यानी बोर्ड की तरफ से प्रयोगात्मक परीक्षा कराई जाएगी।

The new rule came into effect after the Governor’s approval.


बोर्ड द्वारा जारी नए निर्देशों के मुताबिक यह नियम अगले सत्र की परीक्षा से लागू होगा। इसका सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ेगा। पहले स्कूल में ही प्रैक्टिकल के नंबर दिए जाते थे, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया को बदलते हुए पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही जा रही है।

यूपी बोर्ड ने जो प्रस्ताव भेजा था, उस पर अब राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है। जैसे ही राज्यपाल की स्वीकृति मिली, वैसे ही परिषद के नियमों में बदलाव कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पहले ही शासन को चिट्ठी भेजकर इस बदलाव की इजाजत मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद परिषद के विनियमों के अध्याय-13 में संशोधन कर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।

बोर्ड सचिव की तरफ से जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि अब विज्ञान और गृहविज्ञान विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा स्कूल स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे परिषद यानी बोर्ड स्तर से कराई जाएगी।

What is the revised assessment system

नए बदले हुए नियमों के मुताबिक अब हाईस्कूल में विज्ञान और गृहविज्ञान विषय की 30 नंबर की प्रयोगात्मक परीक्षा कराई जाएगी। ये परीक्षा सीधे परिषद यानी बोर्ड की तरफ से आयोजित होगी और कॉपी का मूल्यांकन भी बोर्ड ही करेगा।

सबसे खास बात ये है कि जो नंबर और ग्रेड मिलेंगे, वो सीधे प्रमाणपत्र और अंकपत्र में साफ-साफ दर्ज किए जाएंगे।

पहले क्या होता था कि इन विषयों में प्रैक्टिकल का आंतरिक मूल्यांकन स्कूल में ही होता था। पांच प्वाइंट स्केल की ग्रेडिंग के आधार पर नंबर दिए जाते थे और वही ग्रेड अंकपत्र में चढ़ा दिए जाते थे।

Rules changed to increase transparency

कहा जा रहा है कि अब जब प्रयोगात्मक परीक्षा सीधे परिषद स्तर से कराई जाएगी, तो नंबर देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। यानी अब प्रैक्टिकल के नंबर को लेकर जो सवाल और शिकायतें उठती थीं, उनमें काफी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों की असली प्रयोगात्मक क्षमता का सही आकलन हो सकेगा। पहले स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन होता था, जिसको लेकर कई बार शिकायतें भी सामने आती थीं।

शिक्षा विभाग की ओर से इस पूरे बदलाव की जानकारी बोर्ड प्रशासन को भेज दी गई है और अब नई प्रणाली के तहत आगे की तैयारी शुरू कर दी गई है।

The new system will be implemented in the upcoming examination.

परिषद की तरफ से कहा गया है कि विद्यालय अब प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तैयारी पूरी मजबूती से करें। स्कूलों को अपनी प्रयोगशालाओं की व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी, जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने होंगे और बच्चों को प्रैक्टिकल का सही अभ्यास भी कराना होगा।

बताया जा रहा है कि आने वाली बोर्ड परीक्षा से ही ये नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। यानी हाईस्कूल के छात्रों की परीक्षा प्रणाली में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

सबसे अहम बात ये है कि यह बदलाव राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू किया गया है। हालांकि साफ कर दिया गया है कि विज्ञान और गृह विज्ञान विषय को छोड़कर बाकी सभी विषयों में प्रैक्टिकल का आंतरिक मूल्यांकन पहले की तरह ही चलता रहेगा।

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