किसान भाइयों खाद का नया रेट | यूरिया DAP पोटाश NPK की रेट लिस्ट आयी सामने | अब ये होगा भाव..
Good news for farmer brothers:गेहूं की फसल में दाना भरते समय और आखिरी सिंचाई के दौरान बरती गई सावधानियां आपकी पूरी मेहनत का परिणाम तय करती हैं। जब गेहूं की बालियां पूरी तरह निकल आती हैं और उनमें दूध भरने की अवस्था (Milking Stage) होती है, तब फसल को नमी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इस समय पानी की कमी होने से दाने सिकुड़ जाते हैं और पतले रह जाते हैं, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है।
सिंचाई करते समय सबसे बड़ी सावधानी हवा की गति को लेकर बरतनी चाहिए। यदि तेज हवा चल रही हो, तो सिंचाई बिल्कुल न करें। पानी मिलने के बाद मिट्टी नरम हो जाती है और तेज हवा के कारण फसल गिर (Lodging) सकती है। अगर गेहूं की फसल गिर जाती है, तो दानों का विकास रुक जाता है और कटाई में भी बहुत समस्या आती है। इसलिए हमेशा हवा शांत होने पर, विशेषकर शाम या रात के समय ही पानी देना सुरक्षित रहता है।
खाद प्रबंधन के मामले में, इस अंतिम चरण में यूरिया का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। आखिरी पानी के साथ यूरिया देने से फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाता है और दानों की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। इसके बजाय, दानों की चमक, वजन और मजबूती बढ़ाने के लिए एनपीके 0:0:50 (पोटैशियम सल्फेट) का छिड़काव करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि सिंचाई कब रोकनी है। जब गेहूं का दाना सख्त होने लगे और बालियों का रंग पीला पड़ने लगे, तो सिंचाई बंद कर देनी चाहिए। दाना पकने के बाद अधिक पानी देने से दाने की गुणवत्ता खराब हो सकती है और मिट्टी में अधिक नमी के कारण कटाई में देरी हो सकती है। कटाई से लगभग 10-15 दिन पहले सिंचाई बंद करना फसल के अच्छे से सूखने के लिए आवश्यक है।
संक्षेप में, सही समय पर पानी, हवा का पूर्वानुमान और अनावश्यक रसायनों से बचाव ही गेहूं की बंपर पैदावार का सूत्र है। किसानों को केवल मात्रा पर नहीं, बल्कि दानों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। इन वैज्ञानिक और व्यावहारिक सुझावों को अपनाकर आप अपनी मेहनत को सफल बना सकते हैं और बाजार में अपनी फसल का बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं।